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एस एंड पी बीएसई एसएमई आईपीओ      

बुक बिल्डिंग

पब्लिक इश्यू के बारे में

कंपनियां प्राथमिक बाजार से इनीशियल पब्लिक ऑफर, राइट इश्यू अथवा प्राइवेट प्लेसमेंट के माध्यम से पूंजी जुटा सकती हैं। किसी इनीशियल पब्लिक ऑफर (आईपीओ) के तहत प्राथमिक बाजार में आम जनता को प्रतिभूतियों की विक्री की जाती है। इस इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग को निर्धारित कीमत पद्धति, बुक बिल्डिंग पद्धति अथवा इन दोनों के मिश्रण के माध्यम से पेश किया जा सकता है।

बुक बिल्डिंग के बारे में अतिरिक्त जानकारी

बुक बिल्डिंग मूल रूप से एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कंपनियां कीमत तथा मांग की खोज करते हुए सार्वजनिक प्रस्तावों (पब्लिक ऑफरिंग्स) – प्राथमिक सार्वजनिक प्रस्ताव (इनीशियल पब्लिक ऑफर) तथा फालो ऑन सार्वजनिक प्रस्ताव ( फालो ऑन पब्लिक ऑफर) दोनों – के माध्यम से पूंजी जुटाती हैं। यह एक ऐसी पद्धति है, जिसके तहत ऑफर के लिए बुक के खुले रहने के दौरान निवेशकों से विभिन्न कीमतों पर बिडों का संग्रह किया जाता है, जो निर्गमकर्ता द्वारा निर्धारित प्राइस बैंड के अंतर्गत रहती हैं। यह प्रक्रिया संस्थागत तथा खुदरा दोनों तरह के निवेशकों के संदर्भ में लागू होती है। बिड के बंद होने के बाद, इस प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न हुई मांग के आधार पर इश्यू प्राइस (निर्गम मूल्य) का निर्धारण किया जाता है।

प्रक्रिया:

  • ऑफर लाने वाले निर्गमकर्ता को ‘बुक रनर्स’ के तौर पर लीड मर्चेंट बैंकर (बैंकरों) का नामांकन करना होता है।
  • निर्गमकर्ता जारी की जाने वाली प्रतिभूतियों की संख्या तथा बिडों के लिए प्राइस बैंड का निर्धारण करता है।
  • निर्गमकर्ता सिंडीकेट सदस्यों की भी नियुक्ति करता है, जिनके पास निवेशकों द्वारा अपने ऑर्डर प्लेस किए जाते हैं।
  • सिंडीकेट के सदस्य एक इलेक्ट्रॉनिक बुक में ऑर्डरों को दर्ज करते हैं । इस प्रक्रिया को ‘बिडिंग’ कहा जाता है, जो ओपन ऑक्शन के समरूप होती है।
  • बुक सामान्य तौर पर 5 दिनों के लिए खुला रहता है।
  • बिडों को निर्धारित प्राइसबैंड की सीमा में दाखिल करना होता है।
  • बुक बंद होने के पहले बिडरों द्वारा बिडों में संशोधन किया जा सकता है।
  • बुक बिल्डिंग अवधि के बंद होने पर, बुक रनर विभिन्न कीमत स्तरों पर उत्पन्न मांग के आधार पर बिडों का मूल्यांकन करता है।
  • बुक रनर तथा निर्गमकर्ता उस अंतिम कीमत का निर्धारण करते हैं, जिस पर प्रतिभूतियों का निर्गम किया जाता है।
  • सामान्य तौर पर, शेयरों की संख्या निर्धारित हो जाती है, प्रति शेयर अंतिम कीमत के आधार पर निर्गम आकार (इश्यू साइज) फ्रीज हो जाता है।
  • सफल बिडरों को प्रतिभूतियों का आबंटन किया जाता है तथा शेष लोगों को रिफंड ऑर्डर जारी कर दिया जाता है।